मनुष्य ही नही बल्कि देवता भी जिनके दर्शनों के लिए समय- समय पर धरती पर अवतरित होते है ऐसे पवित्र धामों गंगोत्री व यमुनोत्री मंदिर के कपाट सात मई को अक्षय तृतीया के दिन श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएगें। वेदों व पुराणों में इन मंदिरों की स्तुति के साथ उल्लेख है कि कपाट खुलने पर अखंड़ ज्योति के प्रथम दर्शन करने से समस्त कष्टों का निवारण होता है।
सीमांत जनपद उत्तरकाशी के टकनौर क्षेत्र में स्थित पुण्य धाम गंगोत्री समुद्रतल से 3140 मीटर की ऊचाई पर स्थित है। महाभारत में इस तीर्थ का परिचय गरूड ने गालव ऋषि से इस प्रकार किया कि इसी स्थल पर त्रिलोकीनाथ भगवान शंकर ने राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर आकाश से गिरती गंगा को अपने जटाओं में धारण किया और धरती पर जन कल्याण के लिए उतार दिया। यह पवित्रतम तीर्थ स्थान अत्यंत रहस्यमयी है पर्वतों से घिरे भारी शिलाखंडों और धरातलीय स्थितियों के कारण जब तक गंगोत्री के निकट नही पंहुच जाता तब तक इस तीर्थ स्थल का बोध नही होता इस रहस्यमयी स्थान मे न तो भैरोंवघाटी की भयावहता है और न गर्जन तर्जन ही है । पूर्व दिशा को छोड़कर चारों और चट्टानों वाले पहाड़ खड़े है जो एक परम शांत व अध्यात्म का केन्द्र है। आगामी सात मई को खुलने वाले कपाट को लेकर बाईस अप्रैल को जिलाधिकारी यात्रा से संबन्धित अधिकारियों के साथ गंगोत्री दौरे पर है जहां वे यात्रा व्यवस्थाओं की बैठक भी लेगें पर दिलचस्प सवाल यह है कि पट खुलने में अब मात्र चौदह दिन शेष है ऐसे में टूटी सड़के, बिजली, पानी,चिकित्सा, संचार सुविधा, व लंबें समय से चली आ रही पार्किंग सुविधा का निराकरण हों पाएगा यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
