Monday, February 23, 2009

30 अप्रैल को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट

विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट आगामी 30 अप्रैल को श्रद्धालुओï के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। सोमवार को महा शिवरात्रि के अवसर पर ओïकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ मेï आचार्यो और धर्माधिकारी ने विचार विमर्श के बाद यह तिथि तय की। पंचकेदारोï के शीतकालीन गद्दीस्थल ओïकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ मेï सोमवार को धर्माधिकारी उमा दत्त सेमवाल और कई आचार्यो ने पंचागोï की गणना के बाद भगवान केदारनाथ के कपाट खोलने के लिए 30 अप्रैल का मुहूर्त निकाला। 26 अप्रैल को भगवान केदारनाथ की डोली ओïकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ से विधिवत पूजा अर्चना के साथ प्रस्थान कर रात्रि विश्राम के लिए गुप्तकाशी पहुंचेगी। 27 अप्रैल को भगवान की डोली फाटा तथा 28 अप्रैल को गौरीमाई मंदिर गौरीकुण्ड मेï रात्रि विश्राम करेगी। 29 अप्रैल को बाबा केदार की डोली सुबह गौरीकुण्ड से प्रस्थान कर चौदह किमी की पद यात्रा तय कर केदारनाथ पहुंचेगी। रात्रि विश्राम के बाद 30 अप्रैल को सुबह पूजा-अर्चना एवं वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सवा छह बजे डोली गर्भ गुहा मेï प्रवेश करने के साथ ही मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। इसके पश्चात छह माह तक भगवान यहां अपने भक्तों को दर्शन देïगे।

सोजन्य से जागरण न्यूज़

Thursday, February 12, 2009

मसूरी में जमकर बर्फबारी

बर्फबारी के लिए बेकरार स्थानीय लोगों और सैलानियों की मुराद आखिर पूरी हो ही गई। बुधवार सुबह पर्यटन नगरी मसूरी और आसपास की पहाडि़यों पर जमकर हिमपात हुआ। बर्फ का आनंद लेने यहां देहरादून और अन्य शहरों के लोगों का रेला लग गया। सैलानियों ने बर्फ में खूब अठखेलियां कीं। मसूरी के लोग व सैलानी यहां बर्फबारी का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। कई बार इसकी संभावना बनी, लेकिन निराशा हाथ लगी। बुधवार सुबह बारिश के बाद जमकर हिमपात हुआ। सात बजे से हिमपात का सिलसिला शुरू हुआ। 11 बजे तक रुक-रुककर हिमपात होता रहा। इतना भारी हिमपात नगर में 2002 के बाद पहली बार हुआ है। लाल टिब्बा, हाथीपांव समेत ऊंचाई वाले अन्य इलाकों में करीब नौ इंच बर्फ गिरी है। लंढौर बाजार में 6 व कुलड़ी व लाइब्रेरी बाजार में करीब तीन इंच बर्फ गिरी। उधर, धनोल्टी, सुरकंडा व नागटिब्बा की पहाडि़यों पर भारी बर्फबारी के समाचार मिले हैं। बताया गया कि धनोल्टी करीब डेढ़ फुट बर्फ गिरी है।

सोजन्य से जागरण न्यूज़

Wednesday, February 11, 2009

मौसम की पहली बर्फबारी से सैलानियों की भीड़ उमड़ी

उत्तराखण्ड में इस वर्ष जाड़े के दौरान लगातार सूखे की मार झेल रही विभिन्न जिलों की ऊंची पहाडि़यों ने देर रात पहली बार जमकर बर्फबारी हुई, जिसका आनन्द उठाने के लिये आस पास के इलाकों से सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

पहाड़ों की रानी के नाम से विख्यात मसूरी में देर रात जमकर बर्फबारी हुई जिससे पूरी की पूरी मसूरी बर्फ की चादर से ढक गई। इस मौसम में बर्फ देखने के लिए तरस रहे आसपास के इलाकों के हजारों लोगा बर्फ का आनन्द उठाने के लिये मसूरी पहुंच गए। मसूरी से करीब चालीस किलोमीटर आगे धनोल्टी में भी भारी बर्फबारी का आनन्द उठाने के लिये लोगों की भीड़ उमड़ी है।

एक तरफ जहां ऊंची पहाड़ियों पर बर्फबारी हुई है वहीं देहरादून, हरिद्वार, रिषिकेश के मैदानी इलाकों में जमकर वर्षा हुई, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो गया।

राज्य के बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, मदमहेश्वर, औली गोपेश्वर, नैनीताल, के क्षेत्रों में भी बर्फबारी से ठंडक काफी बढ गई।

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Thursday, February 5, 2009

अनेक रोगों की अचूक औषधि सेहुंड

उत्तराखंड हिमालय में ऐसी वनौषधियों की कोई कमी नहीं है, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के अनेक रोगों का निदान कर देती हैं। पहाड़ में जहां-तहां पाया जाने वाला और किसी काम का न समझा जाने वाला 'सेहुंड' भी ऐसा ही औषधीष पादप है। आयुर्वेद में इसे अनेक व्याधियों की अचूक औषधि बताया गया है।

'सुरू', 'श्योण', 'सुंडु' आदि नामों से पुकारी जाने वाली वनौषधि आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति में प्रयुक्त होने वाली बहुमूल्य जड़ी-बूटी 'स्नुही' या 'सेहुंड' है। पर्वतीय क्षेत्र में इसे 'स्यूण' भी कहा जाता है। सेहुंड की दो प्रजातिया 'यूफोरबिया रायलियाना' व 'नेरिफोलिया' उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बहुतायत में पाई जाती हैं।

सेहुंड का छोटा वृक्ष करीब छह फीट तक ऊंचा होता है, जिसके मांसल एवं कांटेदार तने एवं शाखाएं गोलाकार या पंचकोणीय होती हैं। शीतकाल में इसकी पत्तियां झड़ जाती हैं और वसंत में हरे-पीले फूल एवं तत्पश्चात फल लगते हैं। राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष डा.आदित्य कुमार बताते हैं कि आयुर्वेद में 'वज्रक्षार', 'स्नुहयादि तैल', 'स्नुहयादि वर्ति' सहित सैकड़ों औषधियों के निर्माण में सेहुंड का प्रयोग होता है। यह औषधियां पाचन, रक्तवह व श्वसन संस्थान के रोगों समेत अनेक चर्मरोगों में उपयोगी हैं। वह बताते हैं कि घरेलू चिकित्सा में सूजन एवं दर्दयुक्त स्थानों पर सेहुंड की पत्तियां गर्म करके बांधने पर तुरंत आराम मिलता है। डा.आदित्य के अनुसार कान दर्द में सेहुंड का दूध लाभकारी माना गया है। दांत दर्द में इसके दूध को रुई के फाहे के साथ रखा जाता है। इसके अलावा अनेक चर्म रोगों की घरेलू चिकित्सा में सेहुंड का दूध प्रयोग किया जाता है। बवासीर के अंकुरों पर दूध का लेप करने से वह नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि भगंदर की चिकित्सा में क्षार सूत्र के निर्माण में भी सेहुंड के दूध का प्रयोग किया जाता है।

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