पौड़ी गढ़वाल। विकलांग माता-पिता की बच्ची लबली नेगी के बचपन ने ही उसे चुनौतियों से जूझना सिखला दिया था, और छोटी सी उम्र में ही वह मां-बाप का सहारा बन गई। चुनौती पर चुनौतियों को पार करती लबली के साहस से प्रभावित राज्य सरकार ने उसे तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया। जनपद पौड़ी के धार का महरगांव निवासी लबली नेगी के माता-पिता विकलांग है। वह इस समय विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रही है, लेकिन उसके यहां तक पहुंचने की कहानी काफी संघर्षपूर्ण है। लबली ने 9 वर्ष की उम्र से ही घर के कार्यो की पूरी जिम्मेदारी ली और साथ ही पढ़ाई भी जारी रखी। उसके माता पिता की सिलाई की दुकान है, जहां पर बबली भी सिलाई का कार्य करती है। इसके साथ ही सुबह-साम खाना बनाना व अन्य घरेलू कार्य करने के साथ ही उसने पढ़ाई भी की। इसी दस्तावेज के आधार पर राज्य सरकार ने उसे तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया है। पुरस्कार पाकर लबली व उसके पिता भगवान सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया है।
सोजन्य जागरण न्यूज़
Friday, March 14, 2008
लबली : छोटी उम्र में बनी मां-बाप का सहारा
Monday, March 10, 2008
हस्त शिल्प प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केन्द्
हस्त शिल्प को लेकर उत्तरकाशी में लगी प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। प्रदर्शनी में रिंगाल व स्थानीय ऊन से बने प्रोडक्ट लोगों को खूब भा रहे हैं।
लैंटाना, बांस, रिंगाल से बने प्रोडक्ट देखे जाएं तो रैक, मंदिर, फलदान, आफिस ट्रे, लैंप स्टैंड, टोकरी, कंडी विशेष आकर्षण केन्द्र बने हुए हैं। हाथ से बनी इन वस्तुओं को लेकर लोगों में रुझान भी है। इस प्रदर्शनी की यह भी विशेषता है कि यहां वस्तुओं के विषय में तमाम जानकारियां भी लोगों को दी जा रही है। सीखने के इच्छुक लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। संयोजक गिरीश रमोला ने बताया कि प्रदर्शनी में आगाज फांउडेशन, पीपलकोटी चमोली, दून ग्रामीण सांस्कृतिक मंच, हिमालयन जनजाति कल्याण समिति नाकुरी, हर्षिल, उत्तरकाशी समेत अन्य संस्थाओं द्वारा प्रदर्शनी में वस्तुएं रखी गई हैं।
सोजन्य से जागरण न्यूज़
महिलाओं ने लिया पेड़ों के संरक्षण का संकल्प
उत्तरकाशी। पाला-मनेरी जल विद्युत परियोजना से प्रभावित पाला गांव की महिलाओं ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को गंगा बचाओ दिवस के रूप में मनाया। इस मौके पर महिलाओं ने पेड़ों की रक्षा का संकल्प भी लिया।
रक्षा सूत्र आंदोलन व जल संस्कृति मंच महिला संगठन पाला द्वारा आयोजित महिला दिवस कार्यक्रम में गांव की महिलाओं ने तय किया कि गंगा व गांव की सुरक्षा के लेकर वे हर पल कमर कस कर तैयार रहेंगी। साथ ही उन्होंने संकल्प लिया कि परियोजना के नाम पर वह हरे पेड़ों का कटान नहीं होने देंगी। गांव की पंचायत चौपाल पर हुई महिला गोष्ठी में परंपरागत लोक नृत्यों का प्रस्तुतीकरण भी किया गया। गोष्ठी में हिमला, प्रेम बंधाणी ने कहा कि जंगल ही महिलाओं की जरूरतें पूरी करते हैं, लेकिन तेजी से हो रहे कटान ने महिलाओं की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। पाला गांव के लोगों ने सरकार को पत्र भेजकर पाला गांव का पुनर्वास करने की मांग भी की।
सोजन्य से जागरण न्यूज़Thursday, March 6, 2008
सात मई को खुलेंगे केदारनाथ के कपाट
करोड़ों हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग केदारनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए सात मई को ब्रह्म मूर्त में खुलेंगे। यह तिथि आज ओंकारेश्वर मन्दिर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ निश्चित की गई।
महाशिवरात्रि के पावन पर्व के अवसर पर पंचकेदारों के शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में धर्माधिकारी उमा दत्त सेमवाल, उप मुख्य कार्याधिकारी जेपी नंबूरी, पुजारी गण एवं वेद पाठियों के वैदिक मंत्रोच्चारण व पूजा-अर्चना के साथ बाबा केदार के कपाट खुलने की तिथि सात मई निश्चित की। तीन मई को भैरव पूजा, चार मई को केदारनाथ की उत्सव डोली प्रात: ओंकारेश्वर मन्दिर से प्रस्थान कर गुप्तकाशी होते हुए रात्रि विश्राम फाटा करेगी। पांच मई को भगवान का रात्रि विश्राम गौरीकुंड होगा, छह मई को भगवान की डोली 14 किमी. की चढ़ाई तय कर केदारनाथ पहुंचेगी और सात मई को प्रात: आठ बजे ब्रह्म मूर्त में केदारनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए छह माह के लिए खोल दिए जाएंगे। इस अवसर पर सत्रहवीं गढ़वाल राइफल के जवानों द्वारा बजाई गई भक्ति मय धुन से पूरा क्षेत्र आस्थामय हो गया है। इस दौरान यहां पर ब्रह्मणों ने यज्ञ में आहुति भी दी।
सोजन्य से - जागरण न्यूज़
बधाणीताल: बेपनाह सौंदर्य
कदम-कदम पर प्रकृति ने जनपद रुद्रप्रयाग के पर्यटन स्थलों को बेपनाह सौंदर्य बख्शा है। यहां की मनोहारी छटा सदियों से आकर्षण का केंद्र रही हैं। इन स्थलों में दर्पण के समान चमकते मनोहारी तालों का भी अपना विशिष्ट स्थान है। जखोली ब्लाक में बधाणीताल की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है, लेकिन सरकारी अमले की उदासीनता से प्रकृति का यह अनमोल खजाना पर्यटकों की नजरों में नहीं आ पाया है।
मानव जब शोर-शराबे की दुनिया से दूर इन स्थानों पर पहुंचता है तो वह कुदरत की अनमोल रचना का दृश्यावलोकन कर भावविभोर हो उठता है। विकास खंड के धारकुड़ी तक मोटरमार्ग व 4 किमी. की पैदल यात्रा के बाद बधाणीताल पहुंचा जा सकता है। इस ताल में मनमोहक मछलिया स्वतंत्र रूप से विचरण करती रहती है। सदियों से चली आ रही मान्यता के अनुसार ग्रामीण इन मछलियों को दैवीय प्रतिरूप मानते है। कहा जाता है कि इन मछलियों के शिकार से दैवीय प्रकोप टूट पड़ता है। इस क्षेत्र के इर्द-गिर्द सुरम्य पहाड़ियां, हरी-भरी मखमली बुग्याल, रंग बिरंगी वन्य प्रजातियों के पुष्प और पक्षियों का कलरव सैलानियों व पर्यटकों को खूब भाता है। यहां की प्रकृति के अनमोल खजानों को पर्यटन से जोड़ने के लिए कोई पहल होती नहीं दिखाई दे रही है और जरूरतमंद सुविधाओं का भी टोटा बना है, जिससे पर्यटक यहां कम पहुंच पाते है। इन्हे सुविधाओं से सरसब्ज कर पर्यटकों का ध्यान यहां आकर्षित किया जा सकता है।
सोजन्य से - जागरण न्यूज़
