मंगल स्नान और बरात का दिन
दोस्तो शादी के दिन सबसे पहले सुबह उठ कर नव युवक मंगल द्वारा साज सजावट का काम किया जाता है जैसे कि पतंग लगाना, चमकीले लगना, चांदनी लगाना, तिरपाल ओड़ना.
उसके बाद हल्दी हाथ की रस्म की जाती है. हल्दी हाथ की रस्म भी दोनों शादियों (लड़का-लड़की) में समान होती है. एक ओखल में चावल इत्यादी डालकर उसको कूटा जाता है, कूटने से पहले ओखल में गणेश पूजा की जाती है. कूटने के पश्चात् चावल और हल्दी का जो मिक्चर (घोल) होता है, वर/वधु पूरे मकान में अपने हाथों का एक एक छाप लगाते है. छाप लगाने के बाद मंगल स्नान का कार्यक्रम शुरू होता है.
उत्तराखंड के परम्परागत ढोल-दमु और पीपर बाजे की मधुर ध्वनि के साथ मंगल स्नान शुरू होता है. सबसे पहले पंडित जी द्वारा पूजा की जाती है और बांद देने की प्ररिक्रिया शुरू होती है. परिवार और गाँव के लोगों के द्वारा वर-वधु को बांद दिया जाता है. इस समय परिवार में किसी किसी पर भूत, देवी देवता भी प्रकट हो जाते है, इसलिए माहोल थोड़ा सा ग़मगीन हो जाता है. यदि लड़की की शादी हो तो माहोल और भी ग़मगीन होता है. हर तरफ़ से रोने की सुसुराहट सुनने को मिलती है. हर किसी की ऑंखें नम दिखायी देती है.
मंगल स्नान के समय जो बांद बचता है गाँव के लोग उसका प्रयोग एक दूसरे पर भी लगाते है, ये आपस में मजाक करने का भी एक उपयुक्त समय माना जाता है जिसका कि कोई भी बुरा नही मानता है, इसलिए देवर -भाभी, जीजा-साली एक दूसरे के चेहरे को इससे खूब लीपते है और माहोल थोड़ा सा हास्यप्रद हो जाता है.
मंगल स्नान के बाद वर-वधु को नए कपड़े और आभूषनो से सुशोभित किया जाता है, उनकी आरती उतारी जाती है. गाँव के सभी लोग इस नजारे का आनंद लेते है. इस अवसर पर सभी लोगों के लिए चाय-पाणी, लड्डू-नमकीन का वितरण किया जाता है. इसके बाद वर-वधु को अन्दर कमरे में ले जाया जाता है, जहा पर परिवार के साथ कुछ पूजा की जाती है.
शेष जारी रहेगा......................
Thursday, June 12, 2008
उत्तराखंड में शादी के रीति रिवाज-दुतीय भाग
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1 comments:
बढ़िया है, जारी रहिये.
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