Sunday, May 18, 2008

मद्दमहेश्वर और रुद्रनाथ के कपाट खुल

मध्य हिमालय में स्थित पंचकेदारों में द्वितीय केदार भगवान मद्दमहेश्वर और भगवान रुद्रनाथ के कपाट विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए है। अब छह माह तक भोले की पूजा अर्चना यहीं पर की जाएगी। रविवार सुबह आठ बजे द्वितीय केदार की उत्सव डोली गौंडार गांव से बणतौली, कटरा, नानू, मैखंडा होते हुए मद्दमहेश्वर धाम पहुंची। मंदिर के धर्माधिकारी उमादत्त सेमवाल वेदपाठी विनोद जमलोकी व मद्दमहेश्वर मंदिर के पुजारी गंगाधर लिंग ने वैदिक पूजा-अर्चना के साथ उत्सव डोली से भगवान की मूर्ति को मंदिर के गर्भ ग्रह में स्थापित किया।पंचकेदारों में एक द्वितीय केदार भगवान मद्दमहेश्वर मंदिर में शिव के मध्य भाग नाभि की पूजा-अर्चना की जाती है।
चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद रविवार प्रात: 5:30 बजे दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए गए हैं। साढ़े बारह हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर से छह माह की शीतकालीन अवधि के बाद इस चतुर्थ केदार रुद्रनाथ को रवाना हुई थी। सगर, गंगोलगांव, ग्वाड़, देवलधार व विश्व के खूबसूरत बुग्यालों में से एक पनार से होते हुए भगवान की उत्सव डोली शनिवार को रुद्रनाथ पहुंची थी। जिसका रविवार को वेदोच्चार और मंत्रोच्चारणों के साथ भगवान आसुतोष के अभिषेक के बाद श्रृंगार कर कपाटों को आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। छह माह की ग्रीष्मकालीन अवधि तक भगवान रुद्रनाथ के दर्शनों के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। कपाट खुलने के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित किए। रुद्रनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी प्रयागदत्त भट्ट ने कहा कि पुराणों में चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के दर्शन करने मात्र से ही जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं। नैसर्गिक छटाओं से आच्छादित यह पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए खास तौर पर आकर्षण का केंद्र रहा है, लेकिन 24 किलोमीटर की दुर्गम पैदल यात्रा जहां श्रद्धालुओं को थका देती है, वहीं पंचकेदारों में से एक महत्वपूर्ण केदार क्षेत्र में पहुंचने मात्र से ही श्रद्धालुओं की सारी थकान दूर हो जाती है

सोजन्य से जागरण न्यूज़

1 comments:

munish said...

thanx. badhiya jankaari. aaiye hamare blog par bhi.