Wednesday, May 7, 2008

समय की करवट और आधुनिकता ने बदल दिए हमारे नाम

दोस्तो जैसे आप लोग जानते है कि उत्तराखंड की अपनी एक अलग पहिचान है, अपनी एक अलग संस्कृति सभ्यता,भाषा-बोली है और इसी के आधार पर उत्तराखंडी लोगों की पहिचान की जा सकती है. कहते है कि किसी ब्यक्ति विशेष के नाम से ही उसकी पहिचान की जा सकती है, जैसे कि वो किस मुल्क का रहने वाला है, कोन सी भाषा को बोलने वाला है, उसका धर्म क्या है, समाज क्या है, ये सब उसके नाम से पता लगाया जा सकता है. पहले उत्तराखंडियों लोगों के नाम से ही उनकी पहिचान हो जाती थी, ऐसे नाम जो दुनिया के किसी भी कोने में नही पाये जाते थे, वो नाम होते थे उत्तराखंडियों के, जो कि अपने आप में अदुतीय थे. लेकिन समय के साथ हमसे ये नाम दूर होते चले गए और आज ये आलम है कि अब ये नाम सुनने को भी नही रह गए. मैं इस लेख के माध्यम से अपने उन पूर्वजों के नामों को समेटने की कोशिश कर रहा हूँ , ताकि हमारे आने वाली पीड़ी को भी ये पता चले कि हमारे पूर्वजों के क्या नाम होते थे और आज हमारे क्या नाम है, समय ने कितनी करवट बदल दी, उन नामों की क्या पहिचान थी, क्या मह्त्वा था और आज के हमारे नामों की क्या पहिचान है?.

आप लोगों में बहुत को पढने के बाद कुछ अटपट्टा जरूर लगेगा, लेकिन ये वो नाम है जो शायद अब हमको कभी सुनने को नही मिलेंगे. ये मेरी तरफ़ से अपने पूर्वजों को एक श्रधांजलि है . इसमे पुरूष और महिला दोनों के नाम सम्मलित हैं, मैंने पुरूष महिला का उल्लेख नही किया है.

चतरु
छौन्दाडू
बणी
काल्या
भुरया
सुरतू
मशान्तु
अत्ति
सौणु
मंग्शीरू
चैतू
दुन्ना
झोंती
फप्फा
बैसाखू
अषाडू
सुरि
धनुली
रज्मा
गुड्डी
फागुणी
छौन्दाड़ी
एकादशी
फुल्मुंडया
तीलू
जीत्तू
मोरू
सब्लू
अतरु
बंडवारी
मशंती
गैणा
सुन्दुरु
भंग्ल्या
बौल्या
मंगतु
लाटा
चेपड़
माघी
देवी
छिल्की देवी
घुंगरा देवी
सोणी देवी
नीलकंठी देवी
लूली देवी
बबनी देवी
होशियारू
तोंगी
चैतू
प्राणी
बालक
सिंह
रेवती देवी
दरबान
चिंता
मणि
मूसा
अथरु
गुमान
छोट्या
गोल्या
फंग्नु
फरशा
पंछी
फतूरी
डोखल्या
कानबाई
भ्योंराज
स्यूराज
राडी
बिछना

नाम तो बहुत है लेकिन अभी याद इतने ही आये है

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