पौड़ी गढ़वाल। विकलांग माता-पिता की बच्ची लबली नेगी के बचपन ने ही उसे चुनौतियों से जूझना सिखला दिया था, और छोटी सी उम्र में ही वह मां-बाप का सहारा बन गई। चुनौती पर चुनौतियों को पार करती लबली के साहस से प्रभावित राज्य सरकार ने उसे तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया। जनपद पौड़ी के धार का महरगांव निवासी लबली नेगी के माता-पिता विकलांग है। वह इस समय विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रही है, लेकिन उसके यहां तक पहुंचने की कहानी काफी संघर्षपूर्ण है। लबली ने 9 वर्ष की उम्र से ही घर के कार्यो की पूरी जिम्मेदारी ली और साथ ही पढ़ाई भी जारी रखी। उसके माता पिता की सिलाई की दुकान है, जहां पर बबली भी सिलाई का कार्य करती है। इसके साथ ही सुबह-साम खाना बनाना व अन्य घरेलू कार्य करने के साथ ही उसने पढ़ाई भी की। इसी दस्तावेज के आधार पर राज्य सरकार ने उसे तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया है। पुरस्कार पाकर लबली व उसके पिता भगवान सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया है।
सोजन्य जागरण न्यूज़
Friday, March 14, 2008
लबली : छोटी उम्र में बनी मां-बाप का सहारा
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2 comments:
Way to go! Babli.
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