कदम-कदम पर प्रकृति ने जनपद रुद्रप्रयाग के पर्यटन स्थलों को बेपनाह सौंदर्य बख्शा है। यहां की मनोहारी छटा सदियों से आकर्षण का केंद्र रही हैं। इन स्थलों में दर्पण के समान चमकते मनोहारी तालों का भी अपना विशिष्ट स्थान है। जखोली ब्लाक में बधाणीताल की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है, लेकिन सरकारी अमले की उदासीनता से प्रकृति का यह अनमोल खजाना पर्यटकों की नजरों में नहीं आ पाया है।
मानव जब शोर-शराबे की दुनिया से दूर इन स्थानों पर पहुंचता है तो वह कुदरत की अनमोल रचना का दृश्यावलोकन कर भावविभोर हो उठता है। विकास खंड के धारकुड़ी तक मोटरमार्ग व 4 किमी. की पैदल यात्रा के बाद बधाणीताल पहुंचा जा सकता है। इस ताल में मनमोहक मछलिया स्वतंत्र रूप से विचरण करती रहती है। सदियों से चली आ रही मान्यता के अनुसार ग्रामीण इन मछलियों को दैवीय प्रतिरूप मानते है। कहा जाता है कि इन मछलियों के शिकार से दैवीय प्रकोप टूट पड़ता है। इस क्षेत्र के इर्द-गिर्द सुरम्य पहाड़ियां, हरी-भरी मखमली बुग्याल, रंग बिरंगी वन्य प्रजातियों के पुष्प और पक्षियों का कलरव सैलानियों व पर्यटकों को खूब भाता है। यहां की प्रकृति के अनमोल खजानों को पर्यटन से जोड़ने के लिए कोई पहल होती नहीं दिखाई दे रही है और जरूरतमंद सुविधाओं का भी टोटा बना है, जिससे पर्यटक यहां कम पहुंच पाते है। इन्हे सुविधाओं से सरसब्ज कर पर्यटकों का ध्यान यहां आकर्षित किया जा सकता है।
सोजन्य से - जागरण न्यूज़

2 comments:
पढ़ते ही मन करने लगा कि बधाणीताल होकर आया जाये। दिल्ली से कैसे जा सकते हैं, कितने दिन की छुट्टी लेनी होगी..वगैरह वगैरह..जानकारी कोई दे सके तो अगले महीने बच्चों के साथ वहीं का कूच किया जाये। पढ़कर ही लग रहा है कि दिल्ली की सारी शारीरिक और मानसिक थकान वहां जाकर ज़रूर उतर जायेगी। धन्यवाद।
अजय शर्मा, नई दिल्ली
बधाणीताल का आपका सफर बेहद खूबसूरत है। मैं जरुर जाउँगा । मेरा भी ब्लाग है दुनिया के मेरे सफर पर देखीयेगा।
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