उत्तराखंड के टिहरी जिले के भिलंगना ब्लाक में कई ऐसे पर्यटक स्थल है जो नैसर्गिक सुंदरता से परिपूर्ण होने के साथ ही धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बूढ़ाकेदार के निकट महासरताल बुग्यालों और तालों का अनोखा संगम है, जो बरबस ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में यह पर्यटक स्थल आज भी उपेक्षित है।
बूढ़ाकेदार से 9 किमी पैदल उत्तर दिशा में 33 सौ मीटर की ऊंचाई पर स्थित महासरताल पर्यटक स्थल के साथ-साथ बालगंगा घाटी के 27 गांवों का पौराणिक धार्मिक स्थल भी है। 'महासरताल' की लम्बाई 80 मीटर व चौड़ाई 35 मीटर से भी अधिक है। इस ताल के दक्षिण में एक और ताल है जो माहेश्वरी ताल के नाम से विख्यात है। भाद्र मास व गंगा दशहरे के दिन स्थानीय लोग अपने देवी-देवताओं की डोलियां यहां स्नान के लिए लाते है। गंगा दशहरा पर यहां मेला भी आयोजित किया जाता है। यह इस लिए भी महत्वपूर्ण है कि यहां से पांडव सहस्त्रताल होते हुए स्वर्गारोहण गए थे। महासरताल के समीप ही पांडव डोखरी नामक स्थान है, यहां से धर्म गंगा निकलती है। पुराणों से ज्ञात होता है कि यह नदी धर्मराज की देन है। स्थानीय लोग पांच महीने के लिए अपने मवेशियों के साथ यहां पर छान बनाकर रहते है। सभी खूबियां समेटे यह स्थल प्रचार-प्रसार व सुविधाओं के अभाव में आज भी उपेक्षित है। यदि इस पर्यटक स्थल को विकसित किया जाए तो यहां पर पर्यटन की अपार संभावनाएं है।
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Monday, October 22, 2007
ताल और बुग्यालों का संगम है 'महासरताल'
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4 comments:
महासरताल का दृश्य बड़ा विहंगम है-मनभावन!!
बहुत सुन्दर दृष्य व फोटो है ।
घुघूती बासूती
मनमोहक द्र्श्य है। लेख पसंद आया।
बहुत बढ़िया जानकारी, जारी रखें।
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