म्यारा उतराखंडी भाई बंधो , जिन आप सभी लोगों को पता होलू की हमरा उतराखंड की अपणी एक अलग पहिचान ची, एक अलग सभ्यता संस्कृति और बोली ची, जीं पेर हम्ते बहुत ही गर्व च और हम सब गर्व से बोल्दा हम उतराखंडी छीन. उतराखंडी लोकोक्तियोऊ और मुहवारू कु हमरा अपना पहाड़ मा एक अलग ही स्थान च और हम्ते कभी भी इने भूलने की कोशिश नि कन चैन्द.
8. पौदा बिराल्युं माँ मूसा नि मर दा ...
9. पैन्सा नीई पल्ला ...द्वीए बया कल्ला .....
11. बगैर अफ़ मुर्या स्वर्ग नि जयेन्दु
12. तलब न तन्खा, नाम लछुवा हौलदार.
13. पौ ना पगार, भजदम हवलदार
14. जो नि धोलो अपड़ो मुख, उ क्या देलो हैका सुख।
15. पढ़ाई ळिखाई बल जाट, और १६ दुनी आठ ।
16. नि खांदी ब्वारी , सै-सुर खांदी ।
17. लुखु क सटि बुसाई म्यारा चौल बिसैई
18. भेल़ लमड्यो त घर नी आयो, बाघन खायो त घर नी आयो।
19. मि त्येरा गौं औलू क्या पौलू,तु मेरा गौं ऎल्या क्या लैल्यो।
20. कख उमड़े कख बरखें।
21. ठुलो गोरू लोण बुकाओ,छोटु गोरू थोबड़ु चाटु।
22. लूण त्येरी व्वेन नी धोली,आंखा मीकु तकणा।
23. बिंडि बिरल्यून मूसा नी मरदा।
24. रांडो नाक जी नि हूंदू ता गू भी खा जांदी
25. थूका आंसू लगाणा छन, मूता दिवा जगाणा छन
26. सुबेरौ मुक धोयुँ और बाबू ब्यो कयूँ काम औंद।
27. बांटी बूंटी खाणि गुड़ मिठै, इखुलि इखुलि खाणि गारे कटै।
28. भग्यानो भै काल़ो, अभाग्यू नौनू काल़ो।
29. तुम्हारा जौ, तुम्हारो जन्द्रौ।
30. झूटा सच्चा पितर, गया जैकी दिखेला।
31 नोनियाल की लाई आग , जनाना को देखुए बाघ
32. पढियौं फ़ारसी, बेचणु तैल
33. जख कुख्दो कुखड़ा नि बास दा, वख रात नि होन्दि

1 comments:
बहुत अच्छा संग्रह सुभाष जी, साथ में मुहावरों का अर्थ भी दे देते तो और अच्छा था।
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